Third Eye

नीचे लिखी पंक्तिया साधक की उस अवस्था को दर्शाती हैं, जब वह लगातार आग्नेय चक्र पर संवेदना महसूस करता है। कभी कभी ये संवेदना आग्नेय चक्र से सर पर भी महसूस होती है। साधक सोचता है की कब आग्नेय चक्र खुलेगा और कब ये संवेदनाएं आध्यात्मिक प्रगति में बदलेंगी। नवनीत युवतिया नाचत छम छम नयनन … Continue reading Third Eye

जीवन का धागा

जीवन का धागा ऐसा उलझा लगे कि बस अब सुलझा और तब सुलझा   डोर पकड़ एक रोज चल पड़ा जुलाहा ले संकल्प सुलझाने को उलझन सारी   चार पग थागा सुलझाना क्या काम है बड़ा सोच ये निकला वो खोजने दूसरा सिरा   दो पग चला तो समझा की कुछ और है इसकी लम्बाई … Continue reading जीवन का धागा